गरीब भिखारन कि प्रेरणा दायक कहानी-Inspirational Story of Garib Bhikharan

गरीब भिखारन कि प्रेरणा दायक कहानी-Inspirational Story of Garib Bhikharan
 कहानी-Inspirational Story of Garib Bhikharan

 👉गरीब की उड़ान


एक छोटे से गाँव मे सखु बाई नाम की औरत रहा करती थी, वह बहुत ही गरीब थी। किराए के घर में रहती थी, उसके पति को गुजरे 2 साल हो गए थे। उसे एक लड़का भी था, उसका नाम राजेश था। वह पढ़ने में बहुत ही होशियार था पति के गुजरने के बाद घर चलाने की सारी जिम्मेदारी सखु बाई के कंधों पर आई साथ में राजेश की पढ़ाई का बोझ भी था। 

सखु बाई हमेशा सोचती कि उसका बेटा एक दिन बड़ा अफसर बने, सखु बाई जब काम करती तो राजेश भी उनके साथ जाता। सखु बाई लोगों के घर जाकर कही बर्तन माजती तो कहीं खाना बना देती तो राजेश बैठे बैठे लोगों के घर आए अखबार को बड़े ध्यान से पड़ता।

 एक दिन जब राजेश अखबार पढ़ने लगा तो एक मालकीन ने बड़ी गुस्से से कहा-अखबार पढ़ कर क्या तू बड़ा बन जाएगा। इससे अच्छा तो अपनी मां के काम में हाथ बटाता कम से कम उस की कुछ मदद हो जाती। इस पर राजेश बोला मालकिन मुझे बड़ा अफसर बनना है। हम किताबे नही खरीद सकते तो ज्यादा ज्ञान लेने के लिए अखबार पढ़ता हूं। मालकिन बोली-तुम और अफसर कह कर जोर-जोर से हसने लगी।

सखु बाई को बहुत बुरा लगा और वहाँ से दोनों लोग चले गए। सखु बाई शादियों में रोटी बनाने का काम शुरू किया। वह अकेली 15 से 20 किलो तक की रोटियां बना देती थी। इसके लिए वह 3:00 बजे काम शुरु कर देती थी। उसके साथ राजेश भी उठता था और मां को मदद करके अपनी पढ़ाई करता था।

एक दिन अचानक मकान मालिक उनके पास आए और बोले क्या सकू बाई तुम और तुम्हारा बेटा 3:00 बजे ही उठ जाते हो और यह लाइट जलाते हो,तुम्हारी वजह से बिजली का बिल ज्यादा आ रहा है या तो किराया ज्यादा दिया करो या फिर कमरा खाली कर दो और मकान मालिक गुस्से से वहां से चले गए। राजेश ने लालटेन जलाई और पढ़ाई करने लगा। मां भी उस प्रकाश में रोटियां बनाने लगी।

राजेश ने मन लगाकर पढ़ाई की और क्लास में हमेशा अव्वल आने लगा। राजेश की लगन देखकर पढ़ाई के लिए उसके गुरु जी ने उसे दिल्ली जाने की सलाह दी और खुद खर्चा उठाने की जिम्मेदारी ली। राजेश को 22 साल का हो गया था। फिर क्या था राजेश दिल्ली चला गया और वहां खूब पढ़ाई की। वह घंटो लाइब्रेरी में किताबें पढ़ता रहता फिर एक दिन जब एग्जाम देने जा रहा होता है, तभी राजेश का एक्सीडेंट हो जाता है और उसके बायें हाथ और पैर में चोट लग जाती है और खून बह रहा होता है।

वह सोचता है कि पहले मैं हॉस्पिटल जाउ या परीक्षा देने मेरा पूरा साल बर्बाद हो जाएगा और मेरा खर्चा को उठायेगा मेरे लिए मुमकिन नहीं है ।लेकिन मेरे बाये हाथ मे चोट लगी है लेकिन दांया हाथ तो ठीक है मैं इससे ही परीक्षा दूंगा और वह वहाँ से सीधा परीक्षा केंद्र गया परीक्षा दी और परीक्षा देने के बाद राजेश हॉस्पिटल में भर्ती होकर इलाज करवाया। राजेश ने अस्पताल में भी पढ़ाई जारी रखी और इंटरव्यू अटेंड किया कुछ दिन के लिए राजेश माँ के पास गाँव आ गया।

कुछ दिनों बाद रिजल्ट के दिन माँ ने अखबार खरीद कर लाया और राजेश को परिणाम देखने को कहा। राजेश ने रिजल्ट देखा तो उसने जोर से चीख निकाली मां मैं पास हो गया ट्यूमर बेटा अफसर बन गया। यह सुनते ही माँ की  आंखों से आंसू आ गए। तो दोस्तो इस कहानी हमे यह प्रेरणा मिलती है कि-लक्ष्य प्राप्त करने के लिए मेहनत करनी चाहिए। दुनिया चाहे हम पर हंसे या मजाक उड़ाए लेकिन हमेशा अपने लक्ष्य का पीछा करना चाहिए। कामयाबी जरूर मिलती है।

👉 भिखारन बनी डॉक्टर

एक बार की बात है काशीपुर गांव में जगन नाम का एक भिखारी अपनी बेटी गौरी के साथ रहता था। गौरी की मां का गांव में बड़ी महामारी के कारण देहांत हो गया था और जगन को ठीक से दिखाई नहीं देता। जगन को सही से दिखाई न देने के कारण उसे कहीं भी काम नहीं मिलता और मजबूरन उसे पेट पालने के लिए अपनी बेटी गौरी के साथ भीख मांगना पड़ता था। लेकिन गौरी को भीख मांगना पसंद नहीं था। 

वह पढ़ना लिखना चाहती थी गौरी पिता के साथ गांव के सेठानी के घर भीख मांगने जाती तो वहां उनके बेटे राजू को पढ़ते लिखते देख। उसे खुद के लिए बहुत बुरा लगता है और यह देख सेठानी ताने देती हूं बोलती हरिया देख दरवाजे पर फिर से वही भिखारी होगा।

उसे कुछ भीख देकर उसे भगा जल्दी से, गांव में एक भी अस्पताल नहीं है और अगर इन मनहुसो की बीमारी मेरे बेटे राजू को लग गई तो मैं क्या करूंगी। यह सुन कर वह दोनों वहाँ से चले गए। तब गौरी ने कहा पिता जी सारा गाँव हमसे दूर क्यो भागता है क्या हम बुरे लोग है।

तो पिता जी ने कहा अरे नही बेटा बुराई तो हमारी गरीबी और इनकी सोच में है, तब गौरी ने कहा पिताजी एक दिन मैं भी डॉक्टर बनुगी और सबका इलाज भी कुरूँगी और एक हस्पताल भी खोलूंगी

पिताजी ने कहा बेटी हमारे लिए तो दो वक्त की रोटी जुटाना बड़ा कठिन है ये सब तो बड़े लोगो के सपने है कास मैं तुम्हारे लिए कुछ कर पाता। तभी एक औरत ने गोरी को अपने पास बुलाया और कहा-अगर हमारा टॉयलेट साफ कर दोगी तो मैं तुम्हें कुछ रुपए भीख दूंगी और गौरी ने उनकी बात मानी और उनका टॉयलेट साफ कर दिया लेकिन गौरी को यह बात बहुत ही बुरी लगी। 

उसी समय गोरी ने फैसला कर लिया की वह डॉक्टर बनेगी। गौरी ने अपने पिता को मंदिर के बाहर रहीम चाचा के पास बिठा दिया और वह खुद कई दिनों तक खिलोने बेच कर पैसे कमाने और एक दिन गांव के शिक्षिका रेनू दीदी से मिलकर वह गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने जाने लगी।

गौरी रोज स्कूल से आने के बाद खिलौने बेचती और पैसे कमाती और अपने पिता की देखभाल करती गोरी रात रात भर जगकर पढ़ाई किया करती और हमेशा अच्छे अंको से पास होती है, गौरी के मेनहत और सफलता को गाँव के सभी आदमी और सेठानी अचंभित थे, और वह जगन और गौरी से घृणा भी करने लगे थे।

गाँव के सभी लोग कहते थे पता नहीं यह भिखारन पढ़ लिखकर कौन सा डॉक्टर कलेक्टर बन जाएगी। गौरी हर साल अच्छे से पढ़ाई करती और खूब अंक पति और शिक्षिका रेनू भी गौरी की पढ़ाई में खूब मदद करती धीरे-धीरे समय गुजरता गया और गौरी बड़ी होती गयी।

उसने अपनी मेहनत और लगन से अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरी की और आगे डॉक्टर की पढ़ाई पढ़ने के लिये कालेज में दाखिले के लिए परीक्षा दिया और परीक्षा में टॉप किया। ये खबर सुनकर गौरी के पिता और शिक्षिका रेनू दोनों बहुत खुश हुए।

गोरी ने कहा पिता जी पढ़ाई के लिए मुझे कॉलेज की तरफ से स्कॉलरशिप भी मिला है।लेकिन गौरी को अपने पिता को छोड़कर डॉक्टर की पढ़ाई के लिए शहर जाना था। वह उदास हो गयीतब रेनू ने कहा गौरी तुम फिक्र मत करो मैं यहाँ सब सम्भाल लूंगी। तू बस शहर जा और जल्द डॉक्टर बन कर आना।

गौरी पढ़ने के लिए शहर चली गई। गुजरते समय के साथ वह अपने सपने की तरफ तेजी से कामयाबी के साथ बड़ रही थी। कई दिनों तक कोई खोज खबर नहीं आई। साल बाद गांव में महामारी की बीमारी तेजी से फैल गई और रेनू के पिता सहित सेठानी और उसका बेटा राजू सभी बहुत बीमार हो गए और नगर के एक छोटे से सरकारी अस्पताल में पड़े रहे और कई दिनों से कोई डॉक्टर नहीं आया।

सब बहुत दुखी और बड़े निराश भगवान से जिंदगी की प्रार्थना करने लगी तभी एक नर्स ने सभी को खबर दी की अब तुम लोगो को चिन्ता करने की कोई भी जरूरत नही है सरकार की तरफ से शहर की सबसे बड़ी डॉक्टर साहिबा आप का इलाज करने आने वाली है। यह सुन सभी गाँव वाले बहुत खुश हो गये। तभी वहाँ पर एक गाड़ी आकर रुकती है और उसमे से एक डॉक्टर साहिब उतरती है।

गाँव के सरपंच ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया। जब वह हस्पताल के अंदर आई तो उसे देख सभी हैरान रह गए क्योंकि वह कोई और नहीं गौरी ही थी अपने पिता के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया और फिर उसने सभी गांव वालों का इलाज करना शुरू किया गौरी के इलाज से ही कुछ दिनों में सभी ठीक हो गए। गौरी ने अपने पिता की आंखों का ऑपरेशन करवा कर उनके आंखों की रोशनी भी वापस लायी।

गौरी मेहनत लगन और सफलता की वजह से एक बार फिर सारा गांव महामारी से पूरी तरह मुक्त हो गया और सेठानी सहित बाकी गांव वालों को अपनी गलती का एहसास हो गया। सभी गाँव वाले  गौरी को फूल मालाओं का हार पहनाकर उसके नाम का जय-जयकार करने लगे और यह देख गौरी के पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।

तो बच्चों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि अगर गौरी की तरह मेहनत लगन और दृढ़ निश्चय से किसी काम को किया जाए तो उसनें हमें कामयाबी जरूर मिलती।


👉भिखारन बनी गायिका

माधवपुर के एक गांव में विमला नाम की एक बहुत गरीब औरत अपने बेटे रोशन और बहू गौरी के साथ रहा करती थी। विमला के पति का देहांत हो गया था जिससे सारी जिम्मेदारी उसके बेटे रोशन पर आ गई थी लेकिन गांव में रोशन को कोई काम न मिलने के कारण गरीबी और बेरोज़गारी से उसकी मुसीबते बढ़ती चली गई।

अपील करी थी उसकी मुसीबतें बढ़ती चली गई विमला की बहू गौरी बहुत ही स्वार्थी और लालची स्वभाव की थी। एक दिन उसने अपने पति से कहा, अब यहां कुछ नहीं रखा हमें शहर चले जाना चाहिए। तभी हमारे हालात सुधर पाएंगे वरना हमें भूखा ही मरना पड़ेगा तब रोशन बोला पर माँ तो यह अकेली कैसे तो बोली आप माँ की चिंता मत कीजिये जब आपको नौकरी मिल जाएगी, तब माँ को पैसे भेज दिया करेंगे।

रोशन अपनी माँ को छोड़ पत्नी गौरी के साथ शहर चला जाता है। कई महीने बीत जाने के बाद भी उसकी कोई खबर नहीं आई और बेटे-बहू के शहर चली जाने के बाद विमला पेट पालने के लिए दर-दर भटकने लगी और भीख मांग कर अपना गुजारा करने को मजबूर हो गई। वह हमेशा अपने बेटे का लौट कर आने का इंतजार करती पर उनकी ना तो कोई खबर आई और ना ही उनकी तरफ से कोई पैसा विमला मंदिर और रेलवे स्टेशन में भीख मांगने लगी उसे ज्यादा पैसे नही मिलते और कई दिनों से भूखा ही सोना पड़ता विमला की आवाज बहुत सुरीली थी और उसे गाने का शौक भी था।

इसलिए गाना गाकर भीख माँगना शुरू कर दिया। बाद में धीरे-धीरे लोग विमला का गाना सुनने के लिए इकट्ठा होने लगे। विमल के गाने से लोगो का अच्छा मनोरंजन होता और भीख में थोड़े अच्छे पैसे मिल जाते थे अब विमला रेलवे स्टेशन पर गाना गाती और उसे दो वक्त खाने को मिल जाता। एक दिन विमला रेलवे स्टेशन पर बैठें गाना गा रही थी।

तभी वहां एक सज्जन व्यक्ति जिसका नाम था, आलोक वह विमला के पास आया और आलोक एक फ़िल्म डायरेक्टर था वह विमला को इतनी सुरीली आवाज में गाते हुए सुनकर हैरान रह गया। वो विमला के पास आकर बोला माँ जी मैंने आप का गाना सुना है आप बहुत ही सुरीला गाती है।

मैं चाहता हूं कि आप मेरी नई फिल्म में गाना गाए मुझे आपकी तरह एक नए आवाज की तलाश थी। यह सुनकर बिमला की आंखों में आंसू आ गए। आलोक विमला को अपने साथ मुंबई शहर ले गया और विमला से अपने फिल्मी में गाना भी गवाया और इसके बदले विमला को खूब सारे पैसे मिले देखते ही देखते हैं विमला का गाया हुआ गाना हर जगह खूब सुनने में आया और पसंद भी किया जाने लगा।

वह हर जगह खूब मशहूर हो गई। अब विमला की जिंदगी पूरी तरह से बदल चुकी थी वह एक भिखारन से मशहूर गायिका बन गई थी। उसे टीवी न्यूज़ पेपर में हर जगह दिखाया जाने लगा। एक दिन जब गौरी ने अपनी सास विमला को टीवी पे देखा तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई। उसके मन में पैसे का लालच जाग उठा।

उसने तुरंत ही अपने पति रोशन को यह बात बताई और बोलिए अजी टीवी पर माँ जी, काफी मशहूर और अमीर बन चुकी है। कितने साल बीत गए, हम मां जी से नहीं मिले अब हमें उनके पास चलना चाहिए। आखिर हमारे सिवा उनका है, ही कौन तब रोशन ने कहा, तुम ठीक है ही कहती हो रोशन और गौरी दोनों विमला के पास पहुंचे जहां वह एक बड़े बंगले में रहती थी। सिक्योरिटी गार्ड ने दोनों को अंदर जाने से रोका।

तब विमला ने अपने बेटे की आवाज सुनी और वह फौरन बाहर आई और अपने बेटे को देख विमला जी आंखों में आंसू छलक पड़े उसने फौरन अपने बेटे को गले से लगा लिया और रोती हुई बोली मेरा बेटा आज याद आई तुझे अपनी मां की। मैंने तुझे कितना तलाश किया? अपनी माँ की ममता और प्रेम को देखकर रोशन और गौरी दोनों को अपनी गलती का पछतावा हुआ।

उन दोनों ने माफी मांगी और माँ के लिए अपने बच्चों की खुशी से बढ़कर और कुछ भी नहीं होता है इसलिए विमला ने दोनों को माफ कर के अपने गले से लगा लिया। तो बच्चों मां की खुशी से बढ़कर दुनिया में और कुछ भी नहीं होता है इसलिए हमें अपने स्वार्थ को त्याग कर अपने मां-बाप को कभी अकेला और बेसहारा नही छोड़ना चाहिए।  गरीब भिखारन कि प्रेरणा दायक कहानी-Inspirational Story of Garib Bhikharan